बदरीनाथ धाम की अनोखी मान्यता: जहां लक्ष्मी और उद्धव अलग-अलग विराजते हैं
बदरीनाथ धाम में आज भी एक प्राचीन लोक-धार्मिक परंपरा का पूरी आस्था और विधि-विधान के साथ पालन किया जाता है। मान्यता है कि उद्धव और माता लक्ष्मी के बीच बहू-जेठ का संबंध है, इसलिए दोनों को एक साथ मंदिर में स्थापित नहीं किया जाता। इसी परंपरा के तहत साल के छह महीने माता लक्ष्मी भगवान बदरीनाथ के समीप रहती हैं, जबकि शेष छह महीनों में भगवान बदरीनाथ अपने बड़े भाई माने जाने वाले उद्धव के साथ विराजमान होते हैं।
मंदिर के गर्भगृह में स्थित देव प्रतिमाओं को ‘बदरीश पंचायत’ कहा जाता है। इसमें कुबेर, गरुड़, भगवान बदरीनाथ, उद्धव, नारद तथा नर-नारायण की मूर्तियां शामिल हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार उद्धव को बदरीनाथ भगवान का बड़ा भाई माना जाता है और इसी कारण उन्हें माता लक्ष्मी का जेठ कहा जाता है।
ग्रीष्मकाल में माता लक्ष्मी को उनके अलग मंदिर में विराजमान किया जाता है, जबकि उद्धव की मूर्ति को बदरीश पंचायत में स्थापित कर दिया जाता है। वहीं, शीतकाल के दौरान उद्धव की पूजा योग बदरी मंदिर पांडुकेश्वर में होती है और माता लक्ष्मी भगवान बदरीनाथ के सानिध्य में रहती हैं। पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल के अनुसार यह परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा से निभाई जा रही है।
