वसंत पंचमी की बर्फबारी बनी किसानों के लिए संजीवनी, सेब और रबी फसलों को मिला नया जीवन
वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर शुक्रवार को जिले के ऊंचाई वाले इलाकों—मुक्तेश्वर, रामगढ़, धानाचूली, नाई, पहाड़पानी, भीड़ापानी, मनाघेर, हरतोला, नथुवाखान और ओखलकांडा—में साल की पहली बर्फबारी और व्यापक बारिश ने किसानों के चेहरों पर मुस्कान लौटा दी। लंबे समय से सूखे हालात से जूझ रहे सेब उत्पादक और रबी फसल उगाने वाले किसानों के लिए यह मौसम बेहद राहतभरा साबित हुआ है।
लगातार बारिश से गेहूं, जौ और सरसों जैसी फसलों को आवश्यक नमी मिली है, वहीं हरी सब्जियों को भी जीवनदान मिला है। खासतौर पर असिंचित भूमि पर खेती करने वाले किसानों को इसका सबसे अधिक लाभ होने की उम्मीद है। ओखलकांडा, धारी, रामगढ़, भीमताल और बेतालघाट जैसे क्षेत्रों में बारिश ने सूखे की चिंता को काफी हद तक कम कर दिया है। जिले में कुल 24,982 हेक्टेयर असिंचित भूमि है, जहां यह बारिश वरदान से कम नहीं।
कृषि विभाग के सर्वे के अनुसार अब तक पर्वतीय इलाकों में करीब 20 प्रतिशत गेहूं की फसल प्रभावित हो चुकी थी, लेकिन ताजा बारिश से नुकसान की भरपाई की उम्मीद जगी है। वहीं बर्फबारी से सेब के बागानों को आवश्यक “चिलिंग” मिली है, जिससे उत्पादन, आकार और मिठास में सुधार की संभावना बढ़ी है। किसानों को शनिवार को भी बर्फबारी की उम्मीद है, जो उनकी उम्मीदों को और मजबूती दे रही है।
