बनभूलपुरा रेलवे भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त — पुनर्वास सर्वे और कानूनी बहस तेज
हल्द्वानी के बनभूलपुरा रेलवे भूमि विवाद को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। अदालत ने राज्य सरकार और याचिकाकर्ताओं—दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनीं। राज्य सरकार ने पुनर्वास की योजना रखते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना समेत अन्य योजनाओं का हवाला दिया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि 19 से 31 मार्च के बीच क्षेत्र में विशेष शिविर लगाकर पात्र लोगों की पहचान की जाए और इसकी विस्तृत रिपोर्ट अगली तारीख पर प्रस्तुत की जाए। इस बीच उत्तराखंड सरकार ने अपना हलफनामा भी दाखिल किया। पुनर्वास, मुआवजा और भूमि स्वामित्व को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी कानूनी बहस देखने को मिली।
भारतीय रेल और राज्य सरकार ने बताया कि कुल 13 मामलों में भूमि फ्रीहोल्ड श्रेणी की है, जिन पर मुआवजा देने का प्रस्ताव रखा गया है। वहीं हटाए गए लोगों के लिए वैकल्पिक आवास की संभावना भी जताई गई है। रेलवे का कहना है कि प्रभावित लोग सार्वजनिक भूमि पर अवैध रूप से रह रहे थे।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दावा किया कि लगभग 50 हजार लोग प्रभावित हैं और अधिकांश परिवार सरकारी योजनाओं के दायरे से बाहर हैं। अदालत ने संकेत दिया कि अगली सुनवाई में पुनर्वास और भूमि अधिकारों के कानूनी पहलुओं पर गहन चर्चा होगी।
