आस्था और इतिहास का अद्भुत संगम: शिवमय धाम लाखामंडल
देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती पर स्थित लाखामंडल शिवभक्तों के लिए गहन आस्था और प्राचीन विरासत का अनूठा केंद्र माना जाता है। विकासनगर के समीप यमुना नदी के तट पर बसा यह प्राचीन स्थल प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक महत्व का दुर्लभ संगम प्रस्तुत करता है। आठवीं शताब्दी में निर्मित लाखेश्वर मंदिर परिसर में छोटे-बड़े मिलाकर लगभग सवा लाख शिवलिंग स्थापित हैं, इसी कारण इसे “लाखों शिवलिंगों का गांव” भी कहा जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, स्कंद पुराण के केदारखंड में वर्णित है कि महाभारत काल में पांडव ने यहां असंख्य शिवलिंगों की स्थापना की थी। मंदिर की स्थापत्य शैली केदारनाथ मंदिर से मिलती-जुलती है, जो इसकी प्राचीनता और भव्यता को और प्रभावशाली बनाती है। गर्भगृह में भगवान शिव परिवार सहित विराजमान हैं, जबकि परिसर में मिले पदचिह्नों को माता पार्वती के चरणचिह्न माना जाता है।
यह पवित्र धाम श्रद्धालुओं के लिए भक्ति, इतिहास और रहस्य का अद्वितीय संगम है।
