स्मार्टफोन की लत से घटती लेखन क्षमता, कॉलेज मूल्यांकन में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई
तकनीकी युग में मोबाइल फोन जेन जी के लिए जानकारी और संवाद का मुख्य साधन बन गया है, लेकिन इसका नकारात्मक प्रभाव उनकी भाषा और लेखन दक्षता पर साफ दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया की शॉर्टकट भाषा, स्लैंग और अधूरे जवाब अब छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं में भी दिखने लगे हैं। कॉपी-पेस्ट की बढ़ती आदत ने विद्यार्थियों की भाषायी अभिव्यक्ति को सीमित कर दिया है, जो शिक्षा क्षेत्र के लिए चिंता का कारण बन रही है।
प्रदेश के विभिन्न डिग्री कॉलेजों में चल रहे मूल्यांकन कार्य के दौरान यह स्थिति स्पष्ट हो रही है। हल्द्वानी स्थित एमबीपीजी कॉलेज में अन्य संस्थानों की कॉपियां जांच के लिए भेजी गई हैं। कई उत्तर पुस्तिकाओं में ऐसे उत्तर मिले जिन्हें देखकर शिक्षक भी हैरान रह गए। कुछ विद्यार्थियों ने अंग्रेजों की हड़प नीति के प्रश्न के स्थान पर हड़प्पा सभ्यता का वर्णन कर दिया। वहीं कई छात्रों ने इतिहास और अंग्रेजी के उत्तर रोमन या हिंग्लिश में लिखे। हिंदी के पेपर में कुछ छात्रों ने उत्तरों के बीच फिल्मी गीत भी लिख दिए।
शिक्षकों के अनुसार विद्यार्थी प्रश्नों का क्रम नहीं रखते और कई बार एक ही उत्तर बार-बार लिखते हैं। कई कॉपियों में बड़ी संख्या में पन्ने खाली छोड़े जा रहे हैं। एनईपी 2020 के तहत भाषा पाठ्यक्रम होने के बावजूद विद्यार्थियों में लिखने का अभ्यास घट रहा है, जिससे उनकी भाषा और अभिव्यक्ति क्षमता प्रभावित हो रही है।
