मिठास के इंतज़ार में पहाड़ों का सेब, मौसम बना किसानों की चिंता
नैनीताल जिले की मशहूर फल पट्टी रामगढ़, मुक्तेश्वर और धानाचूली में इन दिनों सेब सहित कई फलों की शुरुआती फसल पेड़ों पर नजर आ रही है। बागानों में हरियाली और फलों की मौजूदगी उम्मीद तो जगाती है, लेकिन किसानों की चिंता भी बढ़ा रही है। पेड़ों पर लगे छोटे आकार के सेब देखने में स्वस्थ हैं, मगर उनमें वह प्राकृतिक मिठास अभी विकसित नहीं हो पाई है, जिसके लिए यह क्षेत्र देशभर में पहचाना जाता है। किसानों और कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सेब के अच्छे आकार, स्वाद और गुणवत्ता के लिए सर्दियों में पर्याप्त बर्फबारी बेहद जरूरी होती है, जो इस बार अब तक नहीं हुई है।
रामगढ़ क्षेत्र का सेब अपनी मिठास और गुणवत्ता के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध रहा है। जिले में करीब 2300 से अधिक किसान सेब उत्पादन से जुड़े हुए हैं। बीते कुछ वर्षों से समय पर हिमपात न होने का असर सेब की पैदावार, साइज और स्वाद पर साफ दिखाई दे रहा है। इस बार भी किसानों को यही डर सता रहा है कि अगर जनवरी के आखिरी सप्ताह तक बर्फ नहीं गिरी, तो फसल को नुकसान झेलना पड़ सकता है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 में जिले में 1039.68 हेक्टेयर भूमि पर सेब की खेती से करीब 4420 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ था। बेहतर पैदावार के लिए लगभग 1200 घंटे की चिलिंग आवश्यक मानी जाती है। वहीं बारिश की कमी से गेहूं, सरसों और जौ उगाने वाले किसान भी परेशान हैं। ओखलकांडा, बेतालघाट, धारी, रामगढ़ और भीमताल क्षेत्रों में फसलों पर रोग और उत्पादन घटने की आशंका गहराती जा रही है।
